वो भी क्या दिन थे …
‘मम्मी’ की गोद और ‘पापा’ के कंधे ,
न पैसे की सोच ,
न लाइफ के funde, न कल की चिंता ,
न फुतुरे के सपने, अब कल की है फ़िक्र और,
अधूरे है सपने , मुड कर देखा तो ,
बहुत दूर है अपने ![]()
मंजिलो को धुंडते कहा खो गए हम ,
आखिर , इतने बड़े क्यों हो गए हम !!
आखिर , इतने बड़े क्यों हो गए हम

