जय बजरंग बली॥जय श्री राम॥ ….शुभप्रभातम्…

February 22nd, 2012 by User | Posted under Religious.
शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदांतवेद्यं विभुम् ।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम् ॥ १ ॥

नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये
सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा ।
भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे
कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च ॥ २ ॥

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥ ३ ॥

यह रामचरितमानस् के पंचम काण्ड सुन्दर काण्ड के प्रारम्भिक श्लोक हैं…सुन्दर काण्ड को रामचरितमानस् का ह्रुदय भी कहा जाता है,,,,क्योंकि इसमें श्री हनुमान जी की महिमा का वर्णन है।…मात्र सुन्दर काण्ड के पठन से सम्पूर्ण रामचरितमानस् के पढने के समान पुण्य प्राप्त होता है।

———-जय बजरंग बली॥जय श्री राम॥ ….शुभप्रभातम्….!!
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