एक दिन एक पेंसिल ने इरेज़र (रबर) से कहा – “मुझे माफ़ कर दो…”
इरेज़र ने कहा – “क्यों? क्या हुआ? तुमने तो कुछ भी गलत नहीं किया!”
पेंसिल बोली – “मुझे यह देखकर दुःख होता है कि तुम्हें मेरे कारण चोट पहुँचती है. जब कभी मैं कोई गलती करती हूँ तब तुम उसे सुधारने के लिए आगे आ जाते हो. मेरी गलतियों के निशान मिटाते-मिटाते तुम खुद को ही खो बैठते हो. तुम छोटे, और छोटे होते-होते अपना अस्तित्व ही खो देते हो”.
इरेज़र ने कहा – “तुम सही कहती हो लेकिन मुझे उसका कोई खेद नहीं है. मेरे होने का अर्थ ही यही है! मुझे इसीलिए बनाया गया कि जब कभी तुम कुछ गलत कर बैठो तब मैं तुम्हारी सहायता करूं. मुझे पता है कि मैं एक दिन चला जाऊँगा और तुम्हारे पास मेरे जैसा कोई और आ जाएगा. मैं अपने काम से बहुत खुश हूँ. मेरी चिंता मत करो. मैं तुम्हें उदास नहीं देख सकता.”






