
No Agony, No Pain, Shall Make Me Cry
Soldier Was I Born
Soldier Shall I Die
I Live By Chance
Love By Choice
And Kill By Profession
We miss home
coz we save homes…..
i love indian Army…

No Agony, No Pain, Shall Make Me Cry
Soldier Was I Born
Soldier Shall I Die
I Live By Chance
Love By Choice
And Kill By Profession
We miss home
coz we save homes…..
i love indian Army…
दिल की कलम से नया इन्कलाब लिखना,
देख ना पाए बेशक हम आज़ादी मगर,
पर थी इस दिल की ये तमन्ना बेताब लिखना,
कर दिया हे आगाज़, जो पहुंचे अंज़ाम तक,
तो इस शहादत पे कुछ सवाब लिखना,
जो चड गए सूली पर वतन की खातिर,
नज्मो में जरा उनका भी हिसाब लिखना,
पर जब भी लिखना ऐ वतन-ए- हिंद, मुझको एक परिंदा “आज़ाद “लिखना …………..
पिताजी जीते जी डैड हो गये
आगे और भी है आप तो अभी से Glad हो गये!
भाई Bro हो गये बहिन अब Sis हो गयी,
दादा दादी की तो हालत टाँय टाँय Fiss हो गयी!
बड़ी बुरी दशा परिचारिका के Mister की हो गयी,
बेचारे की तो बीवी भी Sister हो गयी!
जीती जागती माँ बच्चोँ के लिये Mummy हो गयी,
घर की रोटी अब अच्छी कैसे लगे 5 रुपये की Maggi जो इतनीYummy हो गयी!
दिन भर बेटा CHATTING ही नहीँ करता,
रात मे Mobileपर SETTING भी करता है!
लैला और मजनूँ के भूत भी पछताते हैँ,
क्योँकि उनके नाम अब सड़क किनारे नुक्कड़ पे पुकारे जाते हैँ…………..!
एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते, पर स्वतन्त्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा ।
अगणित बलिदानो से अर्जित यह स्वतन्त्रता, अश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतन्त्रता ।
त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतन्त्रता, दु:खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतन्त्रता ।
इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो, चिनगारी का खेल बुरा होता है ।
औरों के घर आग लगाने का जो सपना, वो अपने ही घर में सदा खरा होता है ।
अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र ना खोदो, अपने पैरों आप कुल्हाडी नहीं चलाओ।
ओ नादान पडोसी अपनी आँखे खोलो, आजादी अनमोल ना इसका मोल लगाओ।
पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है? तुम्हे मुफ़्त में मिली न कीमत गयी चुकाई ।
अंग्रेजों के बल पर दो टुकडे पाये हैं, माँ को खंडित करते तुमको लाज ना आई ?
अमरीकी शस्त्रों से अपनी आजादी को दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो ।
दस बीस अरब डालर लेकर आने वाली बरबादी से तुम बच लोगे यह मत समझो ।
धमकी, जिहाद के नारों से, हथियारों से कश्मीर कभी हथिया लोगे यह मत समझो ।
हमलो से, अत्याचारों से, संहारों से भारत का शीष झुका लोगे यह मत समझो ।
जब तक गंगा मे धार, सिंधु मे ज्वार, अग्नि में जलन, सूर्य में तपन शेष,
स्वातन्त्र्य समर की वेदी पर अर्पित होंगे अगणित जीवन यौवन अशेष ।
अमरीका क्या संसार भले ही हो विरुद्ध, काश्मीर पर भारत का सर नही झुकेगा
एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते, पर स्वतन्त्र भारत का निश्चय नहीं रुकेगा ।
कवी एवं वक्ता – माननीय श्री अटलबिहारी वाजपेयी
हम शकारि विक्रमादित्य हैं अरिदल को दलनेवाले,
रण में ज़मीं नहीं, दुश्मन की लाशों पर चलनेंवाले।
हम अर्जुन, हम भीम, शान्ति के लिये जगत में जीते हैं
मगर, शत्रु हठ करे अगर तो, लहू वक्ष का पीते हैं।
हम हैं शिवा-प्रताप रोटियाँ भले घास की खाएंगे,
मगर, किसी ज़ुल्मी के आगे मस्तक नहीं झुकायेंगे।
देंगे जान , नहीं ईमान,
जियो जियो अय हिन्दुस्तान।
हम सपूत उनके जो नर थे अनल और मधु मिश्रण,
जिसमें नर का तेज प्रखर था, भीतर था नारी का मन !
एक नयन संजीवन जिनका, एक नयन था हालाहल,
जितना कठिन खड्ग था कर में उतना ही अंतर कोमल।
थर-थर तीनों लोक काँपते थे जिनकी ललकारों पर,
स्वर्ग नाचता था रण में जिनकी पवित्र तलवारों पर
हम उन वीरों की सन्तान ,
जियो जियो अय हिन्दुस्तान !
Of course, India will win the cup!
Of course, the team will play and win it, even if I fail to score!
Of course, we are playing in India and fans will support us!
Of course, our fielding should be great!
Of course, our bowling should be strong!
Of course, we need our openers score big!
Of course, our middle order should score!
Of course, our tail should score!
Of course, all the pitches should be spinner friendly!
Of course, our seamers should bowl well and get early wickets!
Of course, Sachin should score 50 tons!
Of course, India will win!
CHAK DE INDIA
Courtesy – Nillo Duggal
What You think About Bringing World Cup Home ???
Im a burning tree, almost done, just till the evening
Still I long for a spring
I wont stay, but my songs will remain
My songs are water and Im a line on its surface
I was torn and made into a flute
In the shape of this flute, Im the scream of that jungle
On a page of fire, Im a line of daffodils
They are debating if Im right or wrong
Im a burning tree, almost done, just till the evening
Still I long for a spring…..
poem by Surjit Patar sahab
Tags: english poem, Surjit Pattar
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